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अपशब्दों का इस्तेमाल है फिल्म डेल्ही बेली

Posted On: 1 Jul, 2011 मस्ती मालगाड़ी में

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मनोज जैसवाल फिल्म 01-delhi-belly-302f_manojjaiswalpbt: डेल्ही बेली कलाकार: इमरान खान, पूर्णा जगन्नाथन, वीर दास, कुणाल रॉय कपूर निर्देशक: अभिनय देव निर्माता: आमिर खान, रोनी स्क्रूवाला, किरण राव रेटिंग: दो स्टार आमिर खान की डेल्ही बेली में अपशब्दों को विस्तार रूप देकर प्रस्तुत किया गया है। फिल्म की भाषा अंग्रेजी शायद इसी विचार से रखी गयी है ताकि बेझिझक अपशब्दों का इस्तेमाल फिल्म में किया जा सके। चूंकि भारत में अंग्रेजी अपशब्द लोकप्रिय हैं और लोग इसका बुरा भी नहीं मानते। जाहिर है निर्देशक की सोच में कहीं से भी सिंगल स्क्रीन थियेटर के दर्शकों के लिए नहीं। फिल्म निस्संदेह बड़े शहरों के युवाओं को आकर्षित करेगी। जिस तरह के उच्चारण में अंग्रेजी में बात की गयी है, वह आम दर्शक वर्ग के समझ से बाहर है, लेकिन इसके बावजूद चूंकि फिल्म का शानदार तरीके से प्रोमोशन किया गया है। दर्शक फिल्म देखेंगे। फिल्म तीन दोस्ती की कहानी है। नीतिन, ताशी और अरुप। अरुप कार्टूनिस्ट है। ताशी पत्रकार और नीतिन उसका फोटोग्राफर। नीतिन अपने दोस्तों में सबसे बिंदास, बेफिक्र रहनेवाला है। उसे सड़क किनारे के स्ट्रीट फूड पसंद है। उसकी यही आदत तीनों दोस्तों को मुसीबत में डाल देती है। ताशी की गर्लफ्रेंड इसी दौरान दृश्य में आती है। वह गैंगस्टर के चंगुल में फंस जाती है। नायक की तरह ताशी उसे छुड़ा ले जाता है, लेकिन फिर भी दोनों एक नहीं हो पाते। डेल्ही बेली ने जिस तरह अपने र्प्रोमोशन में शीट हैप्नस का इस्तेमाल किया है। सच भी यही है कि फिल्म देखने के बाद आप यही महसूस करेंगे कि दुनिया की तमाम गंदगी कैमरे के सामने है। हिंदी सिनेमा में वाकई अब तक इतनी गंदगी का इस्तेमाल नहीं किया गया होगा। फिल्म के कुछ दृश्य को जान बूझ कर बोल्ड बनाने की कोशिश की गयी है। हिंदी सिनेमा में नये सोच, नये प्रयोगों के आधार पर अगर डेल्ही बेली को स्तरीय फिल्म माना जाता है तो भविष्य में अब निर्देशक बनने के लिए अपशब्दों का शब्दकोष भी कंठस्थ करना होगा। अभिनय के दृष्टिकोण से फिल्म के सभी किरदारों ने अपना अभिनय बेहतरीन तरीके से निभाया है। खासतौर से पूर्णा जगन्नाथ में कई संभावनाएं हैं। साथ ही कुणाल के रूप में अच्छा अभिनेता हिंदी सिनेमा को मिला है। फिल्म परिवार के साथ बिल्कुल नहीं देखी जा सकती है। इन दिनों हिंदी सिनेमा में नया ट्रेंड शुरू हो चुका है। फिल्म में गीतों का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। एक लिहाज से यह अच्छा भी है। कम से कम जबरन गाने दृश्य में नहीं डाले जा रहे। फिल्‍म के अंत में आमिर खान का आयटम सांग ‘आइ हेट यू’ बेहतरीन है। इसके अलावा फिल्म में किसी भी गाने को विस्तार रूप देकर नहीं दर्शाया गया, जिस गीत को फिल्म की यूएसपी मान कर दर्शकों के सामने प्रोमोशन के रूप में प्रस्तुत किया गया है, वह गीत फिल्म में केवल फीलर के रूप में ही इस्तेमाल किया गया है। देल्ही बेली पर पाकिस्तान में लगा प्रतिबंध

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

seema के द्वारा
July 4, 2011

movies except some movies can not see.

Tamanna के द्वारा
July 2, 2011

भले ही हमारे फिल्म निर्माता ऐसी भद्दी भाषा और दृश्यों को युवाओं की पसंद मानते हों, लेकिन असल बात तो यह हैं कि अब उनके पसा दिखाने को कुछ बचा ही नहीं.

    manojjaiswalpbt के द्वारा
    July 2, 2011

    तमन्ना जी आपने बिलकुल सही कहा.कुछ फिल्मो को छोड़ कर बाकी फिल्मे परिबार के देख भी नहीं सकते. प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यबाद

प्रेम गुप्ता के द्वारा
July 2, 2011

पोस्ट के लिए बधाई मनोज जी

    manojjaiswalpbt के द्वारा
    July 2, 2011

    प्रेम जी आपको धन्यबाद

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
July 1, 2011

हार्दिक आभार और धन्यवाद आप का आइये सब मिल हिंदी और साहित्य को अपने सीने से लगा इस समाज के लिए -जमीनी सच्चाई में उतर कुछ करें -शुभ कामनाएं शुक्ल भ्रमर ५

    manojjaiswalpbt के द्वारा
    July 2, 2011

    आपका हार्दिक आभार और धन्यवाद शुक्ल जी, हम सब हिंदी साहित्य को नयी उचाई तक ले जाने का ही प्रयास कर रहे है.बस तरीके अलग हो सकते है मकसद एक ही है. आपका मनोज जैसवाल

manojpilibhit के द्वारा
July 1, 2011

सुन्दर प्रस्तुति के लिए धन्यबाद मनोज जी

    manojjaiswalpbt के द्वारा
    July 2, 2011

    प्रतिक्रया के लिए आपका आभार manojpilibhit जी.


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