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क्या स्त्रियां देह प्रदर्शन किए बगैर बिना उन्नति नहीं कर सकतीं !

Posted On: 13 Jul, 2011 मेट्रो लाइफ में

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मनोज जैसवाल: स्त्री व पुरुष का संबंध घी और आग के समान होता है। यह प्राकृतिक नियम है कि पुरुष, स्त्री की तरफ आकर्षित होता है और स्त्री, पुरुष की ओर। यही शारीरिक आकर्षण है, जिससे सृष्टि चल रही है। दोनों एक-दूसरे के लिए सेक्स ऑब्जेक्ट हैं। इसमें कुछ गलत नहीं है। गलत तब होता है, जब दूसरे पक्ष के आकर्षण को उभारने के लिए शारीरिक सौंदर्य का प्रदर्शन किया जाता है। और ऐसे प्रदर्शन को सामाजिक रूप से मर्यादित नहीं किया जाता। जब शारीरिक बनावट को जरूरत से ज्यादा या उत्तेजक ढंग से दिखाते हैं, तो उससे युवकों में वासना जागृत होना स्वाभाविक है। पढ़े-लिखे समझदार और सभ्य लोग तो अपनी भावनाओं को शालीनता से दबा लेते हैं, पर जन साधारण, वे अपनी पाशविकता किसी और पर या जो भी उनके सामने आ जाए, उस पर उतारते हैं। इसीलिए आज यौन अपराधों की संख्या बढ़ रही है। शरीर ढका हुआ भी अच्छा सुंदर लगता है। पुराने जमाने की अभिनेत्रियों जैसे मीना कुमारी, सुरैया, मधुबाला, माला सिन्हा, वहीदा रहमान तन शालीनता से ढक कर भी सुंदर लगती थीं। जब मनुष्य जंगलों में जानवरों की तरह रहता था, तो नंगा ही रहता था। जैसे-जैसे मनुष्य ने तरक्की की, नए-नए आविष्कार हुए, घर बनने लगे तो उसने जानवरों की बजाय मनुष्यों की तरह रहना शुरू किया। जब और हमने हर तरफ इतनी उन्नति की है तो क्यों असभ्यों की तरह नंगा रहना चाहते हैं। यदि आपके सामने बस में या रेल में या सड़क पर कोई पुरुष भी नंगा या अधनंगा नजर आए तो आपको कितना बुरा महसूस होगा, कोई भी उसके पास खड़ा रहना पसंद नहीं करेगा तो क्यों स्त्रियां कम से कम कपड़े पहनती हैं। मुझे यह देखकर बहुत खुशी होती है कि औरतों ने हर जगह पर बहुत उन्नति की है। राजनीति हो या सामाजिक कार्य, खेल कूद या विज्ञान, कोई भी ऐसा कार्य नहीं है, जहां पर वह ऊंचे-ऊंचे पदों पर न हों। फिर क्यों आधुनिकता और फैशन के नाम पर देह प्रदर्शन करने वाली पोशाक को उचित मानती हैं। कोई भी सभ्य समाज इसकी अनुमति नहीं दे सकता। क्या पुरुष वर्ग पूरे कपड़े पहनकर ऑफ़िस नहीं जाता? क्या पुरुषों ने जो उन्नति की है, वह देह प्रदर्शन करके की है तो मैं पूछता  हूँ कि क्या स्त्रियां देह प्रदर्शन किए बगैर उत्तेजक व्यवहार किए बिना उन्नति नहीं कर सकतीं। स्लटवाक के जरिए स्त्री मुक्ति की जो लड़ाई लड़ना चाहती है, इसकी आवश्यकता क्या है? : नोट : यह मरे निजी विचार है अगर किसी को इससे किसी प्रकार की तकलीफ है। तो मै माफ़ी चाहता हू।



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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

प्रेम गुप्ता के द्वारा
July 13, 2011

सुन्दे लेख मनोज जी

    manojjaiswalpbt के द्वारा
    July 24, 2011

    आपका आभार प्रेम जी

Tamanna के द्वारा
July 13, 2011

देह-प्रदर्शन और उन्नति का  क्या संबंध है मुझे यह ही समझ नहीं आया. मुझे लगता है आपकों अपने दृष्टिकोण को विस्तृत करने की आवश्यक्ता है. http://tamanna.jagranjunction.com/2011/07/09/homosexuality-and-gay-rights-in-india/

    manojjaiswalpbt के द्वारा
    July 24, 2011

    प्रतिक्रया के लिए आपका आभार तमन्ना जी, देरी से जबाब देने के लिए माफ़ी चाहता हू मेरा आलेख स्लटवाक के बारे में था.यह जरुरी नहीं कि सब मेरी बात से सहमत हो ?

Anita Paul के द्वारा
July 13, 2011

मनोज जी, स्त्री पक्ष को जाने बगैर आपने पूरे समुदाय को आरोपित किया है? मुझे लगता है कि आपको कपड़े तक सीमित ना रह कर आगे भी सोचना चाहिए.

    manojjaiswalpbt के द्वारा
    July 13, 2011

    अनीता जी आलेख में मैने किसी को आरोपित नहीं किया है.हमारे समाज में स्त्री पक्ष को बहुत सम्मान से देखा जाता है. केवल अपने विचार लिखे है.क्रपया आलेख ध्यान से देखिये.आपका आभार .मनोज जैसवाल

seema के द्वारा
July 13, 2011

आपकी बात आधी सच है.महिलाओ पर जो बीतती है आप उस पर क्यों नहीं लिखते

    manojjaiswalpbt के द्वारा
    July 13, 2011

    सीमा जी इन्तजार कीजिये इस पर जल्द ही आलेख लिखूगा.आपका आभार

manojpilibhit के द्वारा
July 13, 2011

जहा तक अश्लीलता की बात है यह किसी भी समाज में ठीक नहीं है

    manojjaiswalpbt के द्वारा
    July 13, 2011

    प्रतिक्रया के लिए आपका आभार


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